संवेगात्मक बुद्धि : विविध आयाम


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संवेगात्मक बुद्धि' से आशय 

जब हम जीवन में सफलता और खुशियों की बात करते हैं, तब संवेगात्मक या भावनात्मक बुद्धि मानसिक बुद्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई पड़ती है | संवेगात्मक बुद्धि से आशय उस क्षमता से है जो किसी व्यक्ति को उसकी भावनाओं को सकारात्मक रूप से व्यवस्थित करने, प्रयोग करने और उनको समझने में सहयाता प्रदान करती है | भावनाओं या संवेदनाओं का यह व्यवस्थित रूप व्यक्ति को तनाव मुक्त रखने, दूसरों के साथ तालमेल स्थापित करने एवं दूसरों की भावनाओं को समझने का अवसर प्रदान करती है | संवेगात्मक रूप से सबल एक व्यक्ति अपने जीवन को कहीं अधिक संतुलित जीने में कामयाब हो पाता है | फिर बात चाहे उसके व्यक्तिगत संबंधों की हो या सामाजिक संबंधों या कार्यक्षेत्र से सम्बंधित संबंधों की हो | कहा जा सकता है संवेगात्मक बुद्धि एक व्यक्ति को उसके 'स्व' को जानने, उससे जुड़ने और उसकी इकच्छाओं के अनुरूप कार्य करने की समझ देती है

संवेगात्मक बुद्धि को इन चार गुणों के आधार पर अच्छे से समझा जाना जा सकता है और परिभाषित किया जा सकता है-

1. स्व-प्रबंधन (self-Management) – अपनी आंतरिक स्तिथियों तथा संसाधनों का प्रबंधन |

2. आत्म-जागरूकता (self-Awareness) - अपनी आन्तरिक स्तिथियों, पसंदों, संसाधनों तथा अन्तः प्रेरणाओं का ज्ञान |

3. सामाजिक जागरूकता (social-Awareness) – दूसरों की वांछनीय प्रतिक्रियाओं को समाहित करना |

4. संबंध प्रबंधन (Relationship Management) – दूसरों की भावनाओं, जरूरतों तथा परिपेक्ष्यों के प्रति जागरूक रहना एवं उनका प्रबंधन करना |

उपरोक्त गुण या लक्षण आपके जीवन, मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य, आपसी रिश्तों से लेकर आपकी उपलब्धि तक को प्रभावित करतें है | इसीलिए वर्तमान समय में इसे सफल और प्रसन्न जीवन जीने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है

Daniel Goleman define EQ as- " If your emotional abilities are not in hand, if you don't have self awareness, if you are not able to manage your distressing emotions, if you can't have empathy and have effective relationships, then no matter how smart you are, you are not going to get very far" 

पीटर सालवी एवं जॉन डी मेयर इसे निम्न प्रकार से परिभाषित करते हैं-

“संवेगात्मक बुद्धि संवेगों का प्रात्यक्षीकरण करके संवेग का एकीकरण करके विचार को सुलभ बनाने, उन्हें समझने, नियंत्रित करके वयैक्तिक प्रगति को बढ़ाने वाली योग्यता है |”

अतः यह योग्यता व्यक्ति के द्वारा कुछ विशेष प्रकार के अनुकूलात्मक व्यवहारों में भी परिलक्षित होती है |




 

पृष्ठभूमि 

संवेगात्मक बुद्धि की सर्वप्रथम अवधारणा 1950 के दशक में अब्राहम मासलो द्वारा प्राप्त होती है| इस शब्द का प्रयोग पहली बार माइकल बेल्डोक द्वारा 1964 में तथा ल्यूनर के द्वारा 1966 में उनके द्वारा प्रकाशित एक पेपर में होता है | किन्तु वर्तमान सन्दर्भ में सबसे पहले सन 1985 में वाइने पेइनी के द्वारा अपने शोध प्रबंध A study of Emotion: Developing Emotional Intelligence में किया गया था | इसकी प्रसिद्धि एवं व्यापकता डेनियल गॉलमेन की पुस्तक Emotional Intelligence: Why it can matter more than IQ (1995) से शुरू हुई | इस पुस्तक में गॉलमेन संवेगात्मक बुद्धि को एक कौशल और विशेषता के रूप परिभाषित करते हैं जो व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता को विकसित करने में सहायक होती है | और इस तरह वह संवेगात्मक बुद्धि को चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय बना देते हैं | 1983 में, हॉवर्ड गार्डनर के Frames of mind: the theory of multiple intelligence ने इस विचार को प्रस्तुत किया की IQ, संज्ञानात्मक क्षमता को पूरी तरह से समझने में सफल नही है | उनके द्वारा प्रस्तुत मल्टीपल इंटेलिजेंस के विचार में उन्होंने इंटरपर्सनल और इंट्रापर्सनल इंटेलिजेंस का विचार प्रस्तुत किया | और फिर इसके वर्णन और मापन के लिए कई मॉडल्स का विकास किया गया, जिसमें स्टैनले ग्रीनस्पैन का EQ मॉडल, पीटर सालवी का The trait model (2001), जॉन डी मेयर का The ability model (2004) प्रमुख हैं | गॉलमेन का mixed model दिए गये उपरोक्त मॉडल्स का ही सम्मलित रूप है | वर्तमान शोध संवेगों की पहचान को लेकर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करते दिखाई देते हैं, जो दृश्य और श्रृव्य अशाब्दिक संकेतों के अवलोकन के आधार पर भावनात्मक गुणों को संदर्भित करता है |

 

सारांश

मानसिक बुद्धि जहां एक संज्ञानात्मक योग्यता है तो वहीं संवेगात्मक बुद्धि एक भावनात्मक योग्यता या शीलगुण है | दोनों ही व्यक्ति के सर्वागींण विकास में अहम भूमिका निभाते है | संवेगात्मक बुद्धि एक नया प्रत्यय है लेकिन विगत कुछ वर्षों से यह मनोविज्ञान के क्षेत्र में काफी चर्चित रहा है | आलोचना एवं संवर्द्धन की प्रक्रियाओं ने इस प्रत्यय की और मनोवैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर लगातार आकर्षित किया है | कुछ विद्वान इसे एक स्वतंत्र प्रत्यय मानते हैं तो कुछ इसे मानसिक बुद्धि का ही एक अंग मानते हैं | यद्दपि संवेगात्मक बुद्धि के मापन के कई उपकरणों का निर्माण किया जा चुका है किन्तु इनकी विश्वसनीयता और वैधता के सम्बन्ध में काफी संदेह पाया जाता है | बावजूद इसके मनोवैज्ञानिकों के द्वारा संवेगात्मक बुद्धि को बढाने के लिए कई उपाय सुझाए गये हैं | संवेग लब्धि के द्वारा व्यक्ति की संवेगात्मक समायोजन की क्षमता को मानकीकृत ढंग से अभिव्यक्त किया जा सकता है |  



 

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-पूजा

एमएड, प्रथम सेमेस्टर 

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